
देहरादून: वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परिसर संस्थान महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (डब्ल्यू.आई.टी.), सुद्धोवाला, देहरादून के सहायक प्राध्यापक कृष्ण चन्द्र मिश्रा को वर्ष 2025 के लिए आई.ई.ई.ई. उत्तर प्रदेश अनुभाग का ‘उत्कृष्ट अनुभाग स्वयंसेवक पुरस्कार’ प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें एक फरवरी को कानपुर में आयोजित आई.ई.ई.ई. उत्तर प्रदेश अनुभाग की वार्षिक आम सभा के दौरान दिया गया।
कार्यक्रम में आई.ई.ई.ई. यूपी अनुभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेश कुमार सिंह (प्रोफेसर, आई.आई.टी. कानपुर), निर्वाचित अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद रिहान (ए.एम.यू., अलीगढ़), सचिव प्रो. आर.के. सिंह (आई.आई.टी. बी.एच.यू.), संयुक्त सचिव प्रो. वरुण काकर (बी.टी.के.आई.टी., द्वारहाट) सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे। विशेष रूप से प्रो. एस.एन. सिंह (निदेशक, आई.आई.आई.टी.एम., ग्वालियर) और प्रो. जे. रामकुमार (आई.आई.टी. कानपुर) की उपस्थिति रही। पुरस्कार की घोषणा प्रो. आशीष कुमार, अध्यक्ष, पुरस्कार समिति, आई.ई.ई.ई. यूपी अनुभाग द्वारा की गई।
यह पुरस्कार श्री मिश्रा को वर्ष 2025 में आई.ई.ई.ई. यूपी सेक्शन की गतिविधियों में उल्लेखनीय स्वैच्छिक योगदान—कार्यक्रमों के समन्वय, प्रशासनिक सहयोग और सेक्शन-स्तरीय पहलों में सक्रिय सहभागिता—के लिए दिया गया। वर्ष 2016 से वे महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में आई.ई.ई.ई. डब्ल्यू.आई.टी. स्टूडेंट ब्रांच के काउंसलर के रूप में कार्य करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में निरंतर तकनीकी एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, श्री मिश्रा वर्ष 2018 से 2020 तक यंग प्रोफेशनल एफिनिटी ग्रुप, आई.ई.ई.ई. यूपी सेक्शन के चेयर तथा 2021 से 2023 तक संयुक्त सचिव रहे। वर्ष 2025 में उन्होंने सेक्शन हिस्ट्री एंड पब्लिकेशन समिति के चेयरमैन के रूप में भी दायित्व निभाया। वर्तमान में वे आई.ई.ई.ई. वुमेन इन इंजीनियरिंग (WIE) एफिनिटी ग्रुप के सलाहकार हैं।
पुरस्कार प्राप्ति पर श्री मिश्रा ने इसका श्रेय आई.ई.ई.ई. डब्ल्यू.आई.टी. स्टूडेंट ब्रांच की छात्राओं, आई.ई.ई.ई. यूपी अनुभाग के पदाधिकारियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, संस्थान निदेशक, सहकर्मी फैकल्टी सदस्यों तथा अपनी धर्मपत्नी अमिता मिश्रा को दिया।
इसी क्रम में कृष्ण चंद्र मिश्रा ने एक्टिविटी बेस्ड चैप्टर इंसेंटिव अवार्ड में तृतीय स्थान तथा सर्वश्रेष्ठ सोसायटी पुरस्कार भी प्राप्त किया, जो बी.टी.के.आई.टी., द्वारहाट के छात्रों और डॉ. वरुण काकर, प्रोफेसर, बी.टी.के.आई.टी. के साथ संयुक्त रूप से मिला।








